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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही-“FIR का पत्र ही गायब! करोड़ों के सरकारी काम में कथित फर्जीवाड़े पर कार्रवाई ठप, RES पर उठे गंभीर सवाल”

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) मरवाही द्वारा कथित फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर निविदा प्रक्रिया में अनियमितता का मामला अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 24 फरवरी 2026 को थाना पेंड्रा के नाम जारी किया गया एफआईआर दर्ज कराने का आधिकारिक पत्र आखिर आज तक थाना क्यों नहीं पहुंचा?

सूत्रों के अनुसार, जब इस संबंध में थाना पेंड्रा से जानकारी ली गई तो बताया गया कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए ऐसा कोई पत्र आज तक प्राप्त ही नहीं हुआ। ऐसे में कई सवाल स्वतः खड़े हो रहे हैं। आखिर वह पत्र गया कहां? क्या वह विभाग से कभी भेजा ही नहीं गया? या फिर भेजे जाने के बाद रहस्यमय तरीके से गायब हो गया? आखिर सरकारी दस्तावेज जमीन खा गई या आसमान निगल गया?

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गौरतलब है कि स्वयं RES के कार्यपालन अभियंता द्वारा जारी पत्र में कथित फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र, कूटरचना और शासन के साथ धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोपों के आधार पर थाना प्रभारी से एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद महीनों बाद भी यदि मामला पुलिस तक नहीं पहुंचा, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर इसके पीछे किसी स्तर पर मिलीभगत है—यह जांच का विषय बन गया है।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह मामला किसी सामान्य प्रक्रिया का नहीं, बल्कि शासकीय निविदा में कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़ा है। ऐसे मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई अपेक्षित होती है, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होना पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

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सूत्रों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण को दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि ऐसे आरोप सही हैं, तो यह केवल विभागीय अनियमितता नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—एफआईआर का पत्र आखिर गायब कैसे हो गया? यदि पत्र जारी हुआ था तो उसकी डाक रसीद, डिस्पैच नंबर और प्राप्ति का रिकॉर्ड कहां है? शासन और उच्च अधिकारियों को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना होगा कि जिम्मेदारी किसकी है और कार्रवाई कब होगी।

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A Pranav

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